दूसरे धर्म में विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए कोई आर्थिक मदद देने की योजना अभी नहीं है

नयी दिल्ली। सरकार ने आज स्पष्ट किया कि दूसरे धर्म में विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए कोई आर्थिक मदद देने की योजना अभी नहीं है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री विजय सांपला ने लोकसभा में कांग्रेस के तरुण गोगोई के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि अपने धर्म से अलग दूसरे धर्म में विवाह करने वालों के लिए आर्थिक मदद की कोई योजना नहीं है।  अंतरजातीय विवाह के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद के बारे में सांपला ने कहा कि ‘अंतरजातीय विवाह के जरिये सामाजिक एकीकरण की डा. अंबेडकर योजना’ के तहत सरकार ने आर्थिक मदद की राशि ढाई लाख रुपये तय की गई है जिसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों की हिस्सेदारी आधी-आधी होती है। यह राशि पत्नी के नाम तीन साल के सावधि जमा के रूप में दी जाती है।

यदि कोई राज्य इससे ज्यादा की मदद देना चाहता है तो वह इसके लिए स्वतंत्र है, लेकिन अधिक राशि का पूरा भाव उसे ही वहन करना होगा। पहले इसमें काफी असमानता थी। असम में जहाँ मात्र 10 हजार रुपये दिये जाते थे वहीं राजस्थान में पाँच लाख रुपये की मदद दी जाती थी।

आर्थिक मदद के प्रस्तावों की मंजूरी में होने वाली देरी की बात स्वीकार करते हुये सांपला ने कहा कि जिलाधीश या जिला मजिस्ट्रेट जब प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजते हैं तो उसकी पूरी जाँच में समय लगता है। इसके अलावा यह योजना सिर्फ हिंदू विवाह कानून के तहत हुये विवाहों के लिए विवाह के एक साल अंदर आवेदन करने पर ही मान्य होती है। कई बार आवेदक आवेदन में देरी कर देते हैं। इससे भी आवेदन मंजूर नहीं हो पाते।  इससे संबंधित प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 में पाँच, 2015-16 में 72, 2016-17 में 45 और 2017-18 में 87 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी थी।

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